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मानवता की सच्ची परिभाषा

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Part 1 मनुष्य होने के क्या लक्षण हैं? सामाजिक तथ्यों पर मानवता हेतु मुख्य दायित्व क्या हैं? आइये जरा  इस बात पर विचार करें - जीव होने के मुख्य 4 लक्षण होते हैं- 1- आहार ग्रहण करना  2- स्वास लेना  3- भय एवं संघर्ष  4- प्रजनन  आपने अपने जीवन काल में कई प्रकार के जीव-जन्तु तो देखे ही होंगे, रंग-बिरंगे, कद मे बिल्कुल छोटे या अत्यधिक विशालकाय, कई जीव बहुत ही शांत स्वभाव के और कुछ बहुत ही शरारती और कुछ तो इतने ज्यादा वफादार कि हमारे द्वारा किए गए परोपकार को ये तनिक भी नहीं भूलते। हमारी विपदाओं में हमारा साथ कभी नहीं छोड़ते और हमारे लिए यह अपनीं जान की बाजी लगाकर हमें उस परोपकार का फल दे जाते हैं जो हमने कभी इनके लिए किया हो । मनुुष्य के अंंदर जब भी कभी स्वार्थ अपनी चरम सीमा पे पहुुंचा है तब-तब सृृष्टि के मूूल अव्यवों को भारी क्षति पहुुंची है और फिर विनाश हुुआ है ।    एक समय की बात है- पृथ्वी में चारो ओर मनुष्यों में अहंकार, ईर्ष्या, काम, क्रोध और मोह ने अपना आधिपत्य स्थापित कर दिया था। प्रकृति ने फिर अपना प्रकोप चलाया और संपूर्ण मानव ...

जैसी आस्था वैसा भविष्य

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हिन्दू धर्म के सेक्युलर होने से अब आस्तित्व पर एक प्रश्नचिन्ह ??? हमारी परंपरा और संस्कृति के आधार पर आज बहुत सारे घटक इस बात की पुष्टि करते हैं कि हमारे भूत, भविष्य  और वर्तमान हमारे विश्वास और कर्म से प्रभावित होते हैं। प्रत्येक मनुष्य की धारणाएं भिन्न भिन्न होती है और मंजिल  को प्राप्त करने के प्रयास के विकल्प भी भिन्न भिन्न होते हैं जिसका प्रभाव वर्तमान में तो नहीं अपितु भविष्य में अवश्य दिखता है। ज्ञान योग, कर्म योग और भक्ति योग से समस्त मानव का कल्याण होता आया है और जिन लोगों ने इन तीन अवयवों में से किसी एक को भी छोड़ दिया तो सम्पूर्ण जीवन अनियंत्रित होने लगता है, जिसके कारण  घर, परिवार और वातावरण में दुष्प्रभाव आता है। जो संस्कार हमने अपने पूर्वजों से पाए हैं वही हम अपनी पीढ़ी  को भी देते हैं।  यद्यपि हमारा भारत एक अति प्राचीन देश है और सम्पूर्ण विश्व में यह एकलौता हिन्दू राष्ट्र है।  यहाँ सतियुग के प्रमाण  मिल जायेंगे, त्रेता युग में जन्मे भगवान "नारायण"  के अवतार "श्रीराम" के मर्यादा पुषोत्तम होने की अनेको  जानकारी मिल जाएगी जाएगी और द...